Ulfat-e-Yas

Khayal mein sir rakha hain aaj tere shaane per, Ki ro rahi hu main, tu aaj mujhe rone de. Na kuch bol tu,na tu kar izhaar, Bus teri khamoshi ki aawaz mujhe sunne de. Mere hothon pe de de apne zikr ki muskaan, Tere lafzon ke lams se meri ghazal bhigone de. Biccha rakhi hain […]

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Untitled

I wrote this Ghazal in less than five minutes.But I had to scrtach my head for the Title for half an hour.So now I give up and ask my beautiful readers to suggest a title😊 *********** Khud ko khud ka sahara banana padta hain, Zakhmon ko apne khud marham lagana padta hain. Jab shaamil nahi […]

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Zarra-e-ulfat #14

Pesh Hain kuch Shair Ishq ke naam😊 ******** Mere ehsaas ka ek adhura sa misra Hain tu, Lafz Tere ismein shaamil kar yeh ghazal-e-ishq muqammal kar de. (Misra – verse) (Mukammal – complete) ********* Yaqeen nahi aata mujhe iss haqeeqat pe Ki mere khwab bhi ab tujhe chahane lage hain. ********** Tujhe har gham se […]

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Papa (Letter to Dad)

Today I realized I don’t have even one picture with my dad.Or may be it’s there somewhere in Mom’s house but I never tried to find it.When I will visit her next time I will find one. It’s Eid today .Festivals make me homesick.I miss the home which isn’t there anymore.And of everything and everyone […]

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Noor-o-tariqi (Light and darkness)

I was inspired to write this Nazm after reading a wonderful poetry by ESP😊 The words in bold are being said by darkness and the other by light. It’s a debate between light and darkness, each one trying to prove their importance. *********** मैं खुशी की ज़ुबानी मैं अश्क़ों का पानी मैं फतेह की निशानी […]

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Bazm-e-khayal # 19

पेश करती हूं कुछ शेर आप सबके नज़र, अपनी ज़हन की बज़्म से!😊 ******** बंटवारे का गमगीन मंज़र जो बाप से देखा ना गया, वह बोल पड़ा, “घर की हवा भी बांट कर, आपस में तकसीम कर लो” (तकसीम – distribute) (One of the toughest day in a parent’s life is when there is distribution […]

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Zarra-e-ulfat #13

Irshaad bol dijiye 😄 ******** तेरी एक शाम चुराना चाहती हूं, मैं तेरे और क़रीब आना चाहती हूं। कुछ ख्वाबों को हक़ीक़त बनाना चाहती हूं, मैं तेरे और क़रीब आना चाहती हूं। ******** गलती से ही सही तू एक नजर देख ले, यह सोच हम तमेहफिल तुझे देखते रहे। ********* यूं ऐतबार हो गया हैं […]

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Bazm-e-khayal #18

Sharing with you all few more Shairs(couplets). ******** कुछ मुफ्त मिलता नहीं अब ज़िन्दगी के बाज़ार में, यहां खुद को बेचकर हमने रिश्ते खरीदें हैं। ******** कल से आंखों में कुछ चुभ रहा हैं, शायद फिर कोई ख्वाब टूट गिरा हैं। ******** हाथों के ज़ख्म दिख गए मुझे आज उनके, मेरे अपने,जिन्होंने मेरे घर जलाए […]

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Zarra-e-ulfat #12

Sharing with you all lovely readers a few couplets related to “Love”! ******** कभी तुझसे मुलाक़ात ना हुई, फिर क्यों लगता हैं, हमेशा से तुझसे जुदा हूं मैं? ******** कितना क़रीब था तू, यह जाना मैंने, तुझसे दूर जाने के बाद। ******** आ मेरे इश्क़ से तुझे यूं पोशीदा कर दू, कोई तुझे ना देख […]

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Bazm e khayal #17

Sharing some of my yourquote/Instagram posts(These are all instant shayaris,most of them in response to collabs by yourquote😊) The day I said I won’t write anymore I was in a state where I thought I will never be able to pickup a pen again.But when you read others it inspires you to write again.I then […]

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Break

I won’t be writing for may be a few days or may be forever.I wish I can start writing again someday.Till then I would be away. Happy writing you all!!

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New happiness

Painting had always made me happy.I painted until I was in tenth grade.But Later never got a chance to hold the paint brush.In response to some post comment Shantanu told me I should start painting again.And here I am😀.I am gonna need to learn a lot and work on a lot and lot of things.But […]

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Behla liya

ज़ुबान की बात जब कोई ना समझ सका, हमने खामोश रहकर लफ़्ज़ों को बेहला लिया। मुस्कुराहट मुमकिन होती हैं बिना खुशियों के भी, कुछ यूं कहकर हमने लबों को बेहला लिया। हर रात बढ़ जाते हैं ज़ख्म जिल्द ए हयात पर, हर सुबह नए नक़ाब से चेहरे को बेहला लिया। खुद को खुद से जुदा […]

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Zarra-e-ulfat #11

Irshaad boliye aur padhiye yeh kuch Shair mohabbat ke naam 😊   🌙🌙🌙🌙🌙   उर्दू में हर दर्द खूबसूरत लगता हैं, उर्दू का हर लफ्ज़ मोहब्बत लगता हैं।   🌙🌙🌙🌙🌙   बस यही सोचकर फासला बनाए रखते हैं, कि तुमसे ज्यादा क़रीब कोई नहीं हमारे।   🌙🌙🌙🌙🌙   ले जाते हैं जैसे टूटते तारें ख्वाहिशों […]

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Ghar

घर मज़बूत करने के लिए क्या क्या ना करना पड़ा, दीवारें टूट ना जाए इसलिए खुद दफ़न होना पड़ा। इंटे कम, और दरारे जब हो गई इसमें ज्यादा , इंटों के बीच मेरे लहू को भरना पड़ा। गमों के इंट से जब बनने लगा जिस्म का घर, रूह के मकान को फिर से ढलना पड़ा। […]

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Main bhi insaan hu!

रग ए जान काट दी थी तुमने, और मेरा ज़िंदा खून यूंही बहता रहा। दिल जिस्म से निकाल के फेक दिया था, वोह ज़मीन पे गिरकर भी धड़कता रहा। जला रखा था यूं बदन मेरा, जो राख ना होता,बस जलता रहा। हजारों खंजर बर्मा कर पीठ में मेरे, मैं मरकर भी देख जीता रहा। डूबा […]

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Bazm-e-khayal #16

Sharing with you all few more couplets😊 ******** यह टूटे, सूखे, हवा से लड़ते पत्ते, मुझे बहुत सुकून देते हैं। कि मैं अकेली नहीं, जो खत्म होने वाली हूं। ******** नहीं मिलती मर्ज़ी से अपनी खुशियां हमे, इसलिए दूसरो को हस्ता देख हम भी मुस्कुरा लेते हैं। ******** गले मिलने से रंजिशें अब कम नहीं […]

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Ziyarat

लफ़्ज़ों का हाथ थामे,ख़्याल ज़ियारत करते हैं, ख़ाली,अनजाने रास्तों पर। बेमकसद क़दम बड़ते रहते हैं बेफैदा शजरो से भरे दश्त के बीच। चीख लेती हैं मेरी खामोशियां भी कभी उन विरानियों में। पहुंच जाती हूं उन मकामों पे जहां सब कुछ हैं फना। और वही से मैं फिर सबकुछ ले आती हूं। कभी ख्वाब, कभी […]

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Zarra-e-ulfat #10

Sharing with you all few more couplets (Shairs) related to Love😊   ******** रूह से मोहब्बत करने वाले कभी जुदा नहीं होते, जिस्म की तेहजीब रखने वाले कभी बेवफा नहीं होते। (तहजीब – discipline)   ********   यूं भीगो दे तू मुझे अपनी उल्फत की बारिश में, कि मैं आज खुद से रिहा हो जाऊ। […]

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