Khayal 4

I wrote this to highlight the discrimination the government is planning to do by passing CAA,NPR and NRC.After writing this many people on Instagram unfollowed me.But I didn’t stop writing and wrote more poems later.Those who can really understand the situation will know this is injustice against us.I will be posting all the poems related to this one by one.Do let me know in comments what you all think.

22 thoughts on “Khayal 4

  1. बहुत ही खूबसूरत कविता। आप लिखते बेजोड़ हैं। खुशी है आप मेरे काफिले में हैं मगर ये रचना CAA पर फिट नही बैठता।

    साथ चले थे,साथ लड़े थे,आजादी की राह चले थे,
    अलग मुल्क की चाहत तेरी,वतन हमारा तोड़ दिया,
    संग जीने का ख्वाब हमारा तूने सपना तोड़ दिया।
    तूने धरती,अम्बर बांटे,सूरज और समंदर बांटे,
    दर्द नही था तुमको गम के दरिया हमको छोड़ दिया,
    संग जीने का ख्वाब हमारा तूने सपना तोड़ दिया।
    सहर हमारा सहर तुम्हारा,फूल भरा हो शहर तुम्हारा,
    चाहत तुम मुस्कान भरो,अश्कों से रिश्ता जोड़ दिया,
    संग जीने का ख्वाब हमारा तूने सपना तोड़ दिया।
    तिनका,तिनका जोड़ बनाया महल मगर हक तेरा अब,
    जुल्म दुःसह थे,देश बदल गए,शहर,सहर हक तेरा अब,
    मैं विस्थापित महल छोड़,फुटपाथ से रिश्ता जोड़ लिया,
    संग जीने का ख्वाब हमारा तूने सपना तोड़ दिया।

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  2. क्या बात, यास्मिन! जो इस बात की गहराई नही समझ रहे उन्हें वही पता कि उन पर भी इसका असर पड़ेगा।
    तुम यहाँ लिखती रहो। 👍🏼👏🏼👏🏼

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  3. Love the fact that you so beautifully put forth your convictions. I keep myself a blank canvas when it comes to politics, religion, and rights or wrongs, so seldom write or comment where the subject is either….but it is always a pleasure to read something that is written with heartfelt conviction…and that too in such an artistic form.

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